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Rishabh Verma
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पाकिस्तान को समझ आने लगी है चीन की चालाकी, दूरियां बढ़ाने की हो रही है कोशिश

पाकिस्तान को समझ आने लगी है चीन की चालाकी, दूरियां बढ़ाने की हो रही है कोशिश

चीन ने पाकिस्तान को भारत के खिलाफ हमेशा से सपोर्ट किया है। लेकिन अब शायद पाकिस्तान को भी यह लगने लगा है कि चीन के साथ ज़्यादा नज़दीकी उसके लिए खतरे की घंटी बन सकती है। चीन अपनी गुप्त चाल से कब पाकिस्तान को उलझा ले कहा नही जा सकता। इसलिए अब पाकिस्तान के भी कान खड़े हो गए हैं।

पाकिस्तान ने इस बात के संकेत चीन के साथ चल रही उसकी साझी विकास परियोजनाओं से 171.6 मिलियन डॉलर का फंड बाहर निकाल कर दिया है। यह पैसा बेल्ट एंड रोड योजना के अंतर्गत चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर(सी पी ई सी) के इंफ्रास्ट्रक्चर पर ख़र्च होना था। हालांकि पाकिस्तान के द्वारा निकाला गया ये फंड बहुत छोटा है लेकिन यह पाकिस्तानी नेताओं के मन में चीन के प्रति संदेह को दर्शाता है। पाकिस्तान के कई सांसद भी सीपीईसी के बारे में चीन के प्रति शक और चिंता दिखा चुके हैं।

वहीं पाकिस्तान में विपक्ष के नेता मौलाना फज़ल उर रहमान ने सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में आलोचना की है। उन्होंने इमरान सरकार के बेल्ट एंड रोड योजना से पैसा निकालने के क़दम को चोरी करार दिया है। पाकिस्तान की योजना और विकास मंत्रालय ने अपनी सफाई में कहा है कि जो फंड निकाला गया वह कोर फंड का हिस्सा नही बल्कि अतिरिक्त विकास परियोजनाओं का हिस्सा था।

पाकिस्तानी सरकार ने आदेश निकालकर इस बात की सूचना दी थी कि 171.6 मिलियन डॉलर (यानि क़रीब 24 अरब रूपये) को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास के लक्ष्य कार्यक्रम के अंतर्गत खर्च किया जायेगा। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि पाकिस्तान का यह कदम सांसदों को संतुष्ट करने के लिए है तो कुछ के अनुसार पाकिस्तान अभी सीपीईसी को ख़ास वरीयता नही देना चाहता।

इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ सीपीईसी के बारे में पहले भी चिंता व्यक्त कर चुकी है। कैबिनेट के सदस्य रज्जाक दाऊद ने पाकिस्तान को एक साल तक इस योजना से अलग रहने की सलाह दी है साथ ही कहा कि इससे पाकिस्तान को बहुत कम लाभ मिलेगा।

गौर करने लायक बात ये भी है कि हाल ही में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी पाकिस्तान में 20 अरब डॉलर खर्च करने की बात की है। ऐसे में पाकिस्तान का हौसला बढ़ना स्वाभाविक है। इस निवेश के साथ ही पाकिस्तान कुछ साहसिक फैसले लेने में सक्षम हो जाएगा। यदि पाकिस्तान को और नए विदेशी निवेशक मिलते हैं तो चीन के साथ उसके राजनीतिक संबंध और संतुलित हो सकेंगे।

अबू धाबी यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के प्रोफ़ेसर के अनुसार चीन और सऊदी अरब के बीच पाकिस्तान को लेकर कोई प्रतिस्पर्धा नही होने के कारण दोनों आर्थिक मामलों में साथ मिलकर काम कर सकते हैं। ये दोनों बेल्ट एंड रोड योजना में भी एक दूसरे के सहयोगी हैं।

पाकिस्तान के बेल्ट एंड रोड योजना से पैसा निकालने के इस कदम से चीन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नही आयी है। चीन पाकिस्तान के इस क़दम को उसके सीपीईसी से पीछे हटने के रूप में नही देख रहा है। पाकिस्तान के विश्लेषक हसन ख्वार के अनुसार पाकिस्तान देश में बिगड़े आर्थिक हालात के कारण पैसे जुटाने में लगा है और इसलिए वह सीपीईसी से कुछ फंड वापिस लेना चाहता है। उनके अनुसार पाकिस्तान के इस क़दम को सीपीईसी से हटने के तौर पर नही देखा जाना चाहिए।

चीन के उप-विदेश मंत्री के अनुसार सीपीईसी योजना में शामिल प्रोजेक्ट की संख्या में कोई परिवर्तन नही किया गया है। उन्होंने आगे कहा की यदि कोई परिवर्तन होता है तो इससे प्रोजेक्ट की संख्या में बढ़ौतरी ही होगी। अभी चीन ने पाकिस्तान की लोन की मांग पर चुप्पी साधी हुई है। हालांकि उसने सामाजिक विकास और गरीबी उन्मूलन को सीपीईसी में शामिल करने की मांग को स्वीकार कर लिया है। पाकिस्तान को वर्तमान वित्तीय संकट से उबरने के लिए 8 मिलियन डॉलर की आवश्यकता है।