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Prabhat Sharma
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अपने बच्चों को विदेशी स्कूलों में भेज घाटी के मासूमों के हाथों में पत्थर पकड़ा रहे हैं ये अलगाववादी नेता

अपने बच्चों को विदेशी स्कूलों में भेज घाटी के मासूमों के हाथों में पत्थर पकड़ा रहे हैं ये अलगाववादी नेता

कश्मीर घाटी में बार-बार स्कूल तथा कॉलेजों को बंद कराने वाले तथा मासूम बच्चों के हाथ में पत्थर पकड़ाने वाले अलगाववादी नेताओं के बच्चे विदेशों के बड़े स्कूलों में शिक्षा ले रहे हैं। कई अलगाववादी नेताओं के बच्चे उच्च शिक्षा ले रहें हैं तो कईयों के बच्चे विदेशों में ही नौकरी कर रहे हैं। जहाँ एक ओर घाटी में पत्थरबाजी और आतंक से लोगों का जीवन कठिनाइयों में गुजर रहा है वहीं इन नेताओं के बच्चे विदेशों में सुकून की ज़िंदगी जी रहे हैं। इस बात का खुलासा गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले सोमवार को राज्यसभा में किया।

जम्मू कश्मीर में राष्ट्रपति शासन बढ़ाने के विधेयक के संबंध में चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि कैसे 70 साल से कश्मीर की जनता को आधारभूत सुविधाओं से वंचित रखा गया है। उन्होंने अलगाववादी नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि वे आये दिन स्कूल और कॉलेज बंद कराने की कोशिश करते रहते हैं। वे युवाओं को शिक्षा से दूर रखकर उन्हें हिंसा और पथराव के लिए उकसाते हैं। वे खुद तो अपने बच्चों को पढ़ाई और नौकरी के लिए विदेश भेजते हैं लेकिन घाटी में रह रहे युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। खोजबीन के बाद ऐसे कई अलगाववादी नेताओं के नाम सामने आये हैं तो अपने बच्चों को पढ़ने के लिए विदेश भेज रहे हैं।

अलगावादियों के 220 बच्चे हैं विदेशों में

कश्मीर में सक्रिय 112 अलगाववादी नेताओं के लगभग 220 बच्चे विदेशों में पढ़ाई कर रहे हैं। वे वहां उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और नौकरी कर सुकून का जीवन जी रहे हैं। जिन नेताओं के बच्चे विदेशों में पढ़ रहे हैं उनमें हुर्रियत के सभी दिग्गज नेता शामिल हैं। इन नेताओं के बच्चों को कश्मीर की राजनीति से कोई मतलब नहीं है। इन्हें कश्मीर के आतंकवाद और कश्मीरियत से कोई मतलब नही है।

अलगाववादी नेताओं के इस रवैये से उनके दोहरे चरित्र का पता चलता है। वे घाटी के युवाओं को बात बात पर हिंसा के लिए उकसाते हैं और उन्हें देश विरोधी गतिविधियों में झोंक देते हैं, जबकि उनके खुद के बच्चे विदेशों में महफूज रहते हैं। अमित शाह ने राज्य सभा में पेश रिपोर्ट में खुलासा किया की 130 हुर्रियत नेताओं के बच्चे विदेशों में आराम की ज़िंदगी जी रहे हैं।

अलगाववादी और उनके बच्चे

एसएएस गिलानी - इस अलगाववादी ने अपने बेटे को एमबीबीएस की डिग्री दिलवाई और फिर रावलपिंडी में डॉक्टर बनवा दिया। इनकी बेटी भी सऊदी अरब में एक टीचर की नौकरी करती हैं। इनका दामाद इंजीनियर है। गिलानी घाटी में युवाओं को बरगलाने के मामले में सबसे आगे हैं।

उमर फारुख - इनकी बहन रुबिया अमेरिका में डॉक्टर हैं।

आसिया अंद्राबी - आसिया कश्मीर की महिलाओं में अलगाव पैदा करना चाहती है। वे फिलहाल जेल में बंद हैं लेकिन उनका एक बेटा ऑस्ट्रेलिया और दूसरा बेटा मलेशिया में पढ़ रहा है।  

अशरफ सेहराई - हुर्रियत के अशरफ सेहराई ने अपने बच्चों की शिक्षा पर बहुत ध्यान दिया। उनके बेटे खैलद और आबिद सऊदी अरब में नौकरी कर रहे हैं।

मोहम्मद शफी रेशी - इनके सुपुत्र अमेरिका में पीएचडी कर रहे हैं।

अशरफ लाया - अशरफ लाया की बेटी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

बिलाल लोन - इनकी एक बेटी और दामाद लंदन में बसे हैं तथा दूसरी बेटी ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रही है।

मोहम्मद यूसुफ़ मीर - इनकी बेटी भी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रही है।

ख्वाजा फिरदौस वानी - इनका बेटा भी पाकिस्तान में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।