भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसी के कुछ अधिकारियों ने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रॉ (RAW) के अधिकारियों ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिख कर शिकायत की कि वर्ष 1990-92 में हामिद अंसारी ने ईरान में भारत के सुरक्षा हितों को ताक में रखकर ख़ुफ़िया जानकारी ईरानी सरकार तथा उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी “SAVAK” के साथ साझा की थी।

शिकायतकर्ताओं के अनुसार चार मामलों में भारतीय दूतावास के अधिकारियों और कूटनीतिज्ञों का  SAVAK की मदद से अपहरण करवाया गया, लेकिन हामिद अंसारी ने उनको छुड़ाने के लिए कुछ नही किया। रॉ के एक अधिकारी ने हामिद अंसारी पर ईरान में रॉ के ठिकानों को बंद करने की सिफारिश करने का भी आरोप लगाया है।

पीएम मोदी उन अधिकारियों से मुलाक़ात भी कर चुके हैं जो ईरान में हामिद अंसारी के कार्यकाल के दौरान वहीं पर तैनात थे।

भारत के एक अधिकारी संदीप कपूर को मई 1991 में तेहरान हवाई अड्डे से  SAVAK ने अगवा करवा लिया गया था। जब ये सूचना ईरान में भारत के तत्कालीन उच्चायुक्त हामिद अंसारी को दी गई तो उन्होंने उनको ढूंढने की कोशिश करने की बजाय भारत सरकार को घटना की गलत सूचना भेज दी। उन्होंने भारत सरकार को बताया कि यहाँ पर संदीप कपूर गतिविधियाँ संदिग्ध थीं और उनके किसी महिला से संबंध भी थे। कुछ दिनों बाद संदीप का पता एक अनजान कॉल से चला। वे सड़क किनारे पड़े मिले। उनकी शरीर में कोई नशा दिया गया था। इस मामले को ईरानी विदेश मंत्रालय के सामने उठाने के सवाल पर हामिद अंसारी मौन ही रहे।

1991 में रॉ ईरान में हथियारों की ट्रेनिंग लेने आ रहे कश्मीरी नौजवानों पर नजर रख रही थी। रॉ के नए स्टेशन चीफ ने इस बात की जानकारी हामिद अंसारी को दे दी। अंसारी ने इसकी जानकारी ईरानी विदेश मंत्रालय को दे दी जिसके चलते ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले अधिकारी डीबी माथुर का अपहरण कर लिया गया। अंसारी ने माथुर को छुड़वाने के लिए कोई ठोस कदम नही उठाये। इस बात की सूचना अटल बिहारी वाजपेयी तक पहुँचाई गई तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के हस्तक्षेप से माथुर को रिहा कराया गया। माथुर को रिहाई के बाद 72 घंटों के भीतर ईरान छोड़ने की चेतावनी मिली थी।

रॉ के अधिकारियों के द्वारा भेजे गए खत में हामिद अंसारी की तेहरान स्थित पाकिस्तानी दूतावास के साथ लंबी मीटिंग का भी ज़िक्र है। इस मीटिंग की डिटेल्स भारतीय विदेश मंत्रालय तक नहीं पहुँचती थी। प्रधानमंत्री मोदी को लिखी चिट्ठी से अधिकारियों को उम्मीद है कि इस पर प्रधानमंत्री मोदी उचित कार्यवाही करेंगे।

हामिद अंसारी का विवादों से पुराना नाता है। उपराष्ट्रपति रहते हुए उन्होंने शरिया कानूनों का भी समर्थन किया था। उन्होंने कहा था कि पूरे देश में शरिया कोर्ट होने चाहिए। उपराष्ट्रपति पद से हटने के बाद उन्होंने यह भी कह दिया कि वे देश में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं। देश में उनके इस बयान की खूब निंदा की गई थी।